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दर्पण तू सच बोल (दोहावली)

By भूपेन्द्र डोंगरियाल · Poetry · Free to read · eBook on Writro

इस रचना में आपको आज के समाज के प्रतिबिंब को दर्शाते कुल सौ दोहे पढ़ने को मिलेंगे । समसामयिक घटनाओं पर लिखे गए इन दोहों का स्वाद खट्टा-मीठा,तीखा,कडुवा और चटपटा होने के कारण ये पाठकों के दिलोदिमाग में स्वतः अपने लिए जगह बना लेंगे और पाठक का भरपूर मनोरंजन करेंगे।

Chapters

  1. Chapter 1
  2. Chapter 2
  3. Chapter 3
  4. Chapter 4
  5. Chapter 5
  6. Chapter 6
  7. Chapter 7
  8. Chapter 8
  9. Chapter 9
  10. Chapter 10
  11. Chapter 11
  12. Chapter 12
  13. Chapter 13
  14. Chapter 14
  15. Chapter 15
  16. Chapter 16
  17. Chapter 17
  18. Chapter 18
  19. Chapter 19
  20. Chapter 20

About भूपेन्द्र डोंगरियाल

मैं भूपेन्द्र डोंगरियाल हिन्दी साहित्य की गद्य एवं पद्य की कई विधाओं में लेखन कार्य करता हूँ। विशेषकर उपन्यास,कहानियाँ,लघु कहानियाँ,हास्य-व्यंग्य,संस्मरण, गीत,काव्य गीत,दोहा,हाइकू,शेर,गजल,गद्य काव्य विधाओं के लिए मुझे पाठक पहचानते हैं। प्रतिलिपि हिन्दी और कविशाला एप्प पर मेरी रचनाओं 51 मिलियन से अधिक बार पढा गया है।

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