अनुगूँज - 1
By Kavishala · Poetry · ₹25.00 · eBook on Writro
कुछ कविताएँ केवल पढ़ी नहीं जातीं, वे भीतर उतर जाती हैं। कुछ शब्द केवल लिखे नहीं जाते, वे समय के दस्तावेज़ बन जाते हैं। "अनुगूँज" कविशाला समुदाय के 25 कवियों की 40 ऐसी कविताओं का संकलन है जो प्रेम, विरह, उम्मीद, संघर्ष, प्रकृति, समाज, लोकतंत्र, स्त्री, जीवन और मनुष्य के अनगिनत रंगों को शब्द देती हैं। यह संग्रह किसी एक कवि की आवाज़ नहीं, बल्कि उन असंख्य संवेदनशील मनों की प्रतिध्वनि है जो मानते हैं कि कविता आज भी समाज को बदलने की शक्ति रखती है। हर कविता एक नई दुनिया का द्वार खोलती है, हर पृष्ठ एक नया अनुभव देता है, और हर कवि अपने शब्दों से पाठक के भीतर एक नया संवाद शुरू करता है। यदि आप मानते हैं कि शब्द केवल भाषा नहीं, बल्कि परिवर्तन की शुरुआत हैं, तो "अनुगूँज" आपके लिए है। क्योंकि कविता केवल लिखी नहीं जाती—जी जाती है।
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