जालियों का पहरा
By Priyanka Ahuja · Poetry · ₹49.00 · eBook on Writro
इस संग्रह के पन्नों में मात्र शब्द नहीं, बल्कि मेरे दिल के वो जज्बात दर्ज हैं जिन्हें अक्सर हम बयां नहीं कर पाते। 'जालियों का पहरा' सामाजिक बंधनों, प्रेम की कशिश, जुदाई के दर्द और रूहानी अहसासों का एक सफर है। यहाँ शब-ए-हिज्राँ की तन्हाई भी है और एक मोहब्बत का सुकून भी। कभी अपनों से पर्दा करने की बेबसी है, तो कभी जुनून-ए-इश्क की आज़ादी। ये कविताएँ मेरे अंतर्मन का वो आईना हैं, जहाँ हर अक्स बेहद सच्चा और सजीव है। उम्मीद है कि मेरी कलम से निकले ये अल्फाज आपके दिलों को छुएंगे और आप इस रूहानी सफर में खुद को शामिल पाएंगे।
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