जनता लिख रही है
By Ramesh Singh · Poetry · ₹9.00 · eBook on Writro
"जंतर मंतर की कविताएँ" केवल एक कविता-संग्रह नहीं, बल्कि अपने समय की धड़कनों, सवालों, उम्मीदों और जनस्वरों का साहित्यिक दस्तावेज़ है। जब समाज संवाद चाहता है, तब कविता शब्दों से आगे बढ़कर चेतना बन जाती है। इस संकलन में देशभर के कवियों ने लोकतंत्र, संविधान, शिक्षा, न्याय, समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, युवा आकांक्षाओं और मानवीय संवेदनाओं पर अपनी मौलिक रचनाओं के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए हैं। यह पुस्तक किसी एक विचारधारा की नहीं, बल्कि उस विश्वास की है कि एक लोकतांत्रिक समाज में कविता प्रश्न भी पूछ सकती है, संवेदना भी जगा सकती है और संवाद का माध्यम भी बन सकती है। यदि आप मानते हैं कि शब्द समय बदलने की क्षमता रखते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए है। क्योंकि इतिहास केवल घटनाओं से नहीं, उन्हें लिखने वाली कलमों से भी बनता है।
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