गोदान
By प्रेमचंद · Classic Hindi Literature · ₹19.00 · eBook on Writro
प्रेमचंद का कालजयी उपन्यास 'गोदान' (1936) — किसान होरी और उसके परिवार की कथा के ज़रिये भारतीय ग्रामीण जीवन, कर्ज़, जाति, महाजनी शोषण और शहरी मध्यवर्ग के दोहरेपन का सबसे मार्मिक चित्र। एक गाय के दान की साधारण-सी इच्छा कैसे जीवन भर का संघर्ष बन जाती है, यही इस महाकाव्यात्मक उपन्यास का हृदय है। पाठ हिन्दी विकिस्रोत से लिया गया सार्वजनिक डोमेन संस्करण है (सरस्वती प्रेस, बनारस, 1936)।
About प्रेमचंद
मुंशी प्रेमचंद (1880–1936) हिन्दी-उर्दू के सर्वश्रेष्ठ कथाकारों में से एक। 'गोदान', 'निर्मला', 'कफ़न' जैसी रचनाओं के लेखक।
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